जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव, संसद से पास हुआ संशोधन विधेयक

देरी से पंजीकरण कराने की प्रक्रिया होगी सख्त, डिजिटल रिकॉर्ड और राष्ट्रीय डेटाबेस को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, 09 अगस्त 2026।
जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है। लोकसभा ने इसे 31 जुलाई 2026 को तथा राज्यसभा ने 4 अगस्त 2026 को पारित किया। यह विधेयक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करता है।
देरी से पंजीकरण पर बढ़ेगी जांच
संशोधन का एक प्रमुख उद्देश्य जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना तथा लंबे समय बाद होने वाले पंजीकरण में अधिक सख्ती लाना है। विशेष रूप से निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त जांच और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड और केंद्रीय डेटाबेस पर जोर
सरकार की ओर से जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित एवं डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जन्म-मृत्यु से संबंधित आंकड़ों को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डेटाबेस से जोड़ने की व्यवस्था से सरकारी रिकॉर्ड को अपडेट करने और विभिन्न सरकारी सेवाओं में पहचान संबंधी जानकारी के बेहतर उपयोग में मदद मिलने की उम्मीद है।

जन्म प्रमाण पत्र का महत्व और बढ़ेगा
जन्म प्रमाण पत्र पहले से ही व्यक्ति की आयु और जन्मस्थान के महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में इस्तेमाल होता है। शिक्षा में प्रवेश, सरकारी योजनाओं और विभिन्न दस्तावेजों में उम्र संबंधी जानकारी के लिए इसका महत्व है। नए बदलावों के बाद जन्म एवं मृत्यु का सही और समय पर पंजीकरण कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगाम लगाने की कोशिश
सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना तथा गलत अथवा फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए होने वाले दुरुपयोग पर रोक लगाना भी है। देरी से किए जाने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
नागरिकों के लिए क्या जरूरी?
नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे के जन्म अथवा परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर संबंधित घटना का समय पर पंजीकरण कराया जाए और प्रमाण पत्र सुरक्षित रखा जाए। लंबे समय बाद पंजीकरण कराने की स्थिति में अतिरिक्त प्रक्रिया और दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है।
संसद से पारित यह संशोधन जन्म एवं मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित, डिजिटल और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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