
26 प्रांतों के 49 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, छत्तीसगढ़ से नरेश जायसवाल ने साझा किए पर्यावरणीय कार्यों के अनुभव

कोरबा। पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने और आगामी वर्ष की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय पर्यावरण कार्यशाला का आयोजन 3 से 5 अक्टूबर 2026 तक श्री रामकृष्ण ट्रस्ट, कुकमा गांव, भुज, कच्छ (गुजरात) में किया गया। कार्यशाला में देश के 26 प्रांतों से 49 पर्यावरण पदाधिकारियों एवं पर्यावरणविदों ने सहभागिता की। विद्या भारती छत्तीसगढ़ प्रांत की ओर से प्रांतीय पर्यावरण संयोजक श्री नरेश जायसवाल ने प्रतिनिधित्व किया।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में श्री डी. रामा राम बिश्नोई ने आयोजन के उद्देश्य एवं आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि श्री मनोज भाई सोलंकी ने पर्यावरण को “जीवन का कवच” बताते हुए इसके संरक्षण को प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी बताया। वहीं विद्या भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री गोविंद चंद महंत ने पंचभूत आधारित पर्यावरण चिंतन, हरित विद्यालय तथा पर्यावरण शिक्षा को विद्यालयीन गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला में विभिन्न प्रांतों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों तथा आगामी वर्ष की योजनाओं पर PPT प्रस्तुतियां दी गईं। छत्तीसगढ़ की ओर से श्री नरेश जायसवाल ने प्रदेश में संचालित विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने जल प्रबंधन, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोरी बंधान, हर्बल वाटिका और सोलर पैनल जैसे कार्यों के अनुभव प्रस्तुत किए।

इसी क्रम में कार्यशाला के दौरान गाय के गोबर से निर्मित पूजा की थाली, कटोरी एवं दीवार घड़ी जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का अवलोकन भी किया गया। इन उत्पादों ने प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, जैविक सामग्री से उपयोगी वस्तुओं के निर्माण तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वरोजगार की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।

तंत्र, बैठक और प्रवास को प्रभावी पर्यावरण कार्य का आधार बताया
मध्य क्षेत्र से 8 अपेक्षित कार्यकर्ताओं में से 5 कार्यकर्ताओं ने कार्यशाला में सहभागिता की। छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री नरेश जायसवाल ने प्रदेश में किए जा रहे पर्यावरणीय कार्यों और अनुभवों को देशभर से आए प्रतिनिधियों के समक्ष रखा।
समापन सत्र में श्री बालकृष्ण जी ने पर्यावरण कार्य को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने “तंत्र, बैठक एवं प्रवास” को प्रभावी कार्य का आधार बताते हुए नियमित समीक्षा, अनुभव-साझाकरण और जमीनी स्तर पर निरंतर प्रवास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का कार्य केवल किसी एक संस्था या वर्ग तक सीमित न रहकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से व्यापक रूप लेना चाहिए।

कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण को विद्यालयों, परिवारों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल संवर्धन, हरित वातावरण के निर्माण तथा पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर व्यापक मंथन किया गया। आगामी वर्ष में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी एवं परिणाममूलक बनाने के लिए विभिन्न प्रांतों की कार्ययोजनाओं और अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया।







