
15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता, कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिल सकते हैं नए अवसर
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात की सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य सीमा शुल्क का प्रावधान किया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय उत्पादों को मिलेगा शुल्कमुक्त बाजार
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारतीय निर्यात की 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त किया जाएगा। इससे कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों सहित विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों को लाभ मिलने की संभावना है।
भारत सरकार के अनुसार, न्यूजीलैंड में कुछ उत्पादों पर पहले लागू सीमा शुल्क 10 प्रतिशत तक था। समझौते के प्रभावी होने के बाद संबंधित भारतीय उत्पादों को शुल्कमुक्त बाजार पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के अवसर बनेंगे। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पादों की मांग, गुणवत्ता, लागत और अन्य लागू व्यापारिक शर्तों पर निर्भर करेगा।
भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता है।
प्रस्तावित निवेश से भारत में कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे कारोबारी साझेदारी और नई परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि 20 अरब डॉलर की राशि निवेश संबंधी प्रतिबद्धता है, न कि भारत में पहले से प्राप्त हो चुका निवेश। वास्तविक निवेश का प्रवाह परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं एवं सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर, यानी लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुक्त व्यापार समझौते को इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शुल्क संबंधी रियायतों के साथ-साथ सेवाओं, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, व्यापार को निर्धारित स्तर तक पहुंचाना दोनों देशों के कारोबारियों की भागीदारी, बाजार की परिस्थितियों और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए भी अवसर
समझौते में सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। भारत सरकार के अनुसार, इसके तहत कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए एक समय में अधिकतम 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, युवाओं के लिए प्रतिवर्ष 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा का अवसर भी शामिल किया गया है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (STEM) के स्नातकों और डॉक्टरेट धारकों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने की सुविधाओं से संबंधित प्रावधान भी समझौते का हिस्सा हैं। इन अवसरों का लाभ संबंधित पात्रता, वीजा नियमों और निर्धारित शर्तों के अधीन मिलेगा।
घरेलू किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का ध्यान
मुक्त व्यापार समझौते में भारत ने अपने कुछ संवेदनशील कृषि एवं डेयरी क्षेत्रों को संरक्षण देने के लिए कई उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है।
भारत सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दूध, क्रीम, पनीर और अन्य प्रमुख डेयरी उत्पादों के साथ प्याज, चीनी तथा कुछ अन्य कृषि उत्पादों को भी अपवर्जन सूची में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापारिक अवसरों का विस्तार करना है।
भारतीय कारोबारियों के लिए क्या है इसका महत्व
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों से जुड़े कारोबारियों के लिए नए व्यापारिक रास्ते खुलने की संभावना है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए निर्यातकों को न्यूजीलैंड के गुणवत्ता मानकों, उत्पाद संबंधी नियमों, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और खरीदारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना होगा।







