
विष्णु भैया की मदद से घर की जरूरतें पूरी करने में मिल रही बड़ी राहत
कोरबा, 02 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही है।
कोरबा नगर के पथर्रीपारा निवासी श्रीमती नेहा परवीन भी महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उनके लिए हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता घरेलू खर्चों को व्यवस्थित करने में उपयोगी साबित हो रही है। नेहा बताती हैं कि परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के बीच कई बार छोटे-छोटे खर्चों के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती थी। ऐसे में योजना से मिलने वाली राशि से वे घर की आवश्यक वस्तुओं और अन्य जरूरी खर्चों में अपनी ओर से योगदान कर पाती हैं।
महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में एक हजार रुपये प्राप्त होने पर नेहा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “विष्णु भैया की यह मदद हमारे जैसे परिवारों के लिए बहुत बड़ा सहारा है। हर महीने राशि मिलने से घर की जरूरतों को पूरा करने में आसानी होती है। 31वीं किस्त मेरे लिए खुशी के साथ भरोसा भी लेकर आई है।”
नेहा का कहना है कि योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें परिवार की जरूरतों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी करने का अवसर दिया है। समय पर आर्थिक सहायता मिलने से छोटे घरेलू खर्चों को संभालना आसान हुआ है और संभव होने पर कुछ राशि बचाकर रखने की सुविधा भी मिलती है।
उन्होंने कहा, “पहले छोटी जरूरतों के लिए भी कई बार सोचना पड़ता था, लेकिन अब हर महीने मिलने वाली राशि से काफी राहत मिलती है। इससे मैं घर के खर्चों में अपनी ओर से सहयोग कर पाती हूं। यह योजना महिलाओं को सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं दे रही, बल्कि परिवार के लिए मजबूत सहारा बनने का विश्वास भी दे रही है।”
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता नेहा के लिए रोजमर्रा की जरूरतों को सहज बनाने के साथ आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम बनी है। उनका मानना है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। उनके लिए हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि अब घरेलू जरूरतों में सहयोग के साथ भविष्य को लेकर विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद का आधार बन गई है।






