
वन विभाग के मैदानी अमले को बनाया गया जवाबदेह, वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण रेस्टोरेशन पर जोर
खनन के बाद वन भूमि के पुनरुद्धार (रेस्टोरेशन) कार्यों को प्रभावी और परिणामपरक बनाने के लिए वन विभाग के मैदानी अमले को भी नियमित निगरानी के लिए जवाबदेह बनाया गया है। संबंधित वन मंडलाधिकारी एवं उनके अधीनस्थ अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर पुनरुद्धार कार्यों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने तथा निरीक्षण एवं प्रगति की जानकारी विभागीय अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि खनन प्रभावित वन भूमि की बहाली केवल कागजी अनुपालन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। रेस्टोरेशन कार्यों की गुणवत्ता, लगाए गए पौधों की उत्तरजीविता, भूमि की स्थिति तथा निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के पालन की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

अधिकारियों से कहा गया कि पुनरुद्धार कार्यों में स्थानीय एवं देशज प्रजातियों के पौधों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही मृदा संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वन्यजीव संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए समग्र एवं टिकाऊ रेस्टोरेशन व्यवस्था विकसित की जाए।
वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा नियमित क्षेत्र भ्रमण और सतत निगरानी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खनन के बाद प्रभावित क्षेत्रों में निर्धारित पुनरुद्धार कार्य समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से पूरे हों। उद्देश्य केवल वन भूमि को पूर्व स्थिति में लाना नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों को पुनः स्वस्थ, समृद्ध और टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करना है।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि वन संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से रेस्टोरेशन कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए तथा प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से सुनिश्चित की जाए।






